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Showing posts from June, 2013

बचपन में खास थे ... जवानी में, आम बन गये..

चार पन्ने कॉपी से निकाल कर... जहाज बनाया करते थे... बरसात की नालियों में... बेबाक तैरती थीं.. हवाओं में उड़ाते थे, हमारे खुद के हवाई जहाज.. मिट्टी की गाड़ियों के कितने ही काफिले थे.. अपनी शिक्षिका से डरते थे.. चुपके चुपके उन्ही पे मरते थे.. इश्क़ जैसी बला से कोसों दूर... माँ की गोद में महफूज़... सरहद.. नफ़रत.. मज़हब.. सियासत.. शब्दकोष में भी न थे हमारे... छत की मुंडेर पे खड़े... अपनी सल्तनत के सुल्तान हम... आज चंद सिक्कों के ग़ुलाम बन गये... बचपन में खास थे ... जवानी में, आम बन गये..