अपने जब अपने न रह जाएँ
जीवन के हर सपने बिखर से जाएँ।
मंजिलोँ के रास्ते भटक से जाएँ।
या फिर बढ़ते कदम खुद ही ठिठक जाएँ॥
तब तू ही बता ऐ खुदा,
क्या हम जिन्दगी की राह पर चलते जाएँ।
या फिर मौत की राह से गुजर जाएँ॥
जीवन के हर सपने बिखर से जाएँ।
मंजिलोँ के रास्ते भटक से जाएँ।
या फिर बढ़ते कदम खुद ही ठिठक जाएँ॥
तब तू ही बता ऐ खुदा,
क्या हम जिन्दगी की राह पर चलते जाएँ।
या फिर मौत की राह से गुजर जाएँ॥
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