Skip to main content

ऐ खुदा, तू बता॥

अपने जब अपने न रह जाएँ
जीवन के हर सपने बिखर से जाएँ।

मंजिलोँ के रास्ते भटक से जाएँ।

या फिर बढ़ते कदम खुद ही ठिठक जाएँ॥

तब तू ही बता ऐ खुदा,

क्या हम जिन्दगी की राह पर चलते जाएँ।


या फिर मौत की राह से गुजर जाएँ॥

Comments

Popular posts from this blog

A Soldier's Poetry

भर जाएँगे घाव, बिसर जाएगी टीस, है ना, हमारे पास समय का मलहम, और काम आएगा संयम, काम आएगा सामर्थ्य, काम आऍगे ईश्वर, भर जाएँगे घाव॥

Welcoming the 9th month of the year

बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।

न होगी गमोँ की रात, न होगी कष्टोँ की बरसात, बदलेगा अपना भी जीवन, खुशियोँ से भर जायेँगे दामन, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। दिन बदलेँगे अपने भी, होगा इक नया सवेरा, चिड़ियोँ की चहकन से गूँजेगा अपना बसेरा, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तब न आएगी कोई मुश्किल, न बिगड़ेगी कोई बात, लम्बे होँगे खुशियोँ के दिन, कम होगी कष्टोँ भरी रात, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तुम चलना मेरे संग-संग, बदलेँगे अपने रंग-ढंग, हो जाएँगे गैर भी अपने, पूरे होँगे अपने सपने, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।