न गज़ल के बारे में कुछ पता है मुझे---,
न ही किसी कविता के---,
और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,
बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,
लिख देती हूँ "मेरे मन की"---
न ही किसी कविता के---,
और न किसी कहानी या लेख को मै जानती---,
बस जब भी और जो भी दिल मे आता है---,
लिख देती हूँ "मेरे मन की"---
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