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अब क्या लिखेँ हम कागज पर , अब लिखने को क्या बाकी है ।

इक अक्स था जो दिल मेँ वो टूट गया । इक श्रद्धा थी जो छूट गयी ।
Aisa hi kuch likhna chahte the but ab kuch b krne ka man ni hota kuch b ni. . . . .

mai to isko broken heart b na kah sakta. . . . . .
qki pas hokar b pas ni h, aur dur hokar b dur ni h. . .
ab ye blog useless h, hm isko close kr denge.

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A Soldier's Poetry

भर जाएँगे घाव, बिसर जाएगी टीस, है ना, हमारे पास समय का मलहम, और काम आएगा संयम, काम आएगा सामर्थ्य, काम आऍगे ईश्वर, भर जाएँगे घाव॥

Welcoming the 9th month of the year

बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।

न होगी गमोँ की रात, न होगी कष्टोँ की बरसात, बदलेगा अपना भी जीवन, खुशियोँ से भर जायेँगे दामन, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। दिन बदलेँगे अपने भी, होगा इक नया सवेरा, चिड़ियोँ की चहकन से गूँजेगा अपना बसेरा, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तब न आएगी कोई मुश्किल, न बिगड़ेगी कोई बात, लम्बे होँगे खुशियोँ के दिन, कम होगी कष्टोँ भरी रात, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तुम चलना मेरे संग-संग, बदलेँगे अपने रंग-ढंग, हो जाएँगे गैर भी अपने, पूरे होँगे अपने सपने, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।