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मैँने आँसू बनकर देखा है॥

पढ़ लिए सारे शास्त्र,
रट लिए वेद पुराण,
पर समझ न पाया इसकी भाषा,
इसकी पीड़ा, करुणा और अभिलाषा,

एक अश्रु जो कभी,
गम को दर्शाता है,
तो कभी खुशियोँ को भी,
अंखियोँ मेँ दिखाता हैँ,

कौन जाने क्या होगी इसकी कहानी,
दिल मेँ आग दृगोँ मेँ पानी,

मिलेँगे हर मोँड़ पर आँसू,
जीवन भी टेढ़ी रेखा हैँ,
जानता हूँ मैँ इसको क्योँकि,


मैँने आँसू बनकर देखा हैँ॥

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बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।

न होगी गमोँ की रात, न होगी कष्टोँ की बरसात, बदलेगा अपना भी जीवन, खुशियोँ से भर जायेँगे दामन, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। दिन बदलेँगे अपने भी, होगा इक नया सवेरा, चिड़ियोँ की चहकन से गूँजेगा अपना बसेरा, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तब न आएगी कोई मुश्किल, न बिगड़ेगी कोई बात, लम्बे होँगे खुशियोँ के दिन, कम होगी कष्टोँ भरी रात, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तुम चलना मेरे संग-संग, बदलेँगे अपने रंग-ढंग, हो जाएँगे गैर भी अपने, पूरे होँगे अपने सपने, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।