पढ़ लिए सारे शास्त्र,
रट लिए वेद पुराण,
पर समझ न पाया इसकी भाषा,
इसकी पीड़ा, करुणा और अभिलाषा,
एक अश्रु जो कभी,
गम को दर्शाता है,
तो कभी खुशियोँ को भी,
अंखियोँ मेँ दिखाता हैँ,
कौन जाने क्या होगी इसकी कहानी,
दिल मेँ आग दृगोँ मेँ पानी,
मिलेँगे हर मोँड़ पर आँसू,
जीवन भी टेढ़ी रेखा हैँ,
जानता हूँ मैँ इसको क्योँकि,
मैँने आँसू बनकर देखा हैँ॥
रट लिए वेद पुराण,
पर समझ न पाया इसकी भाषा,
इसकी पीड़ा, करुणा और अभिलाषा,
एक अश्रु जो कभी,
गम को दर्शाता है,
तो कभी खुशियोँ को भी,
अंखियोँ मेँ दिखाता हैँ,
कौन जाने क्या होगी इसकी कहानी,
दिल मेँ आग दृगोँ मेँ पानी,
मिलेँगे हर मोँड़ पर आँसू,
जीवन भी टेढ़ी रेखा हैँ,
जानता हूँ मैँ इसको क्योँकि,
मैँने आँसू बनकर देखा हैँ॥
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