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जल ही जीवन

पानी तेरी यही कहानी,
तेरे बिना अवनि अनजानी,
झरनोँ का था संगीत अमर,
नदियाँ भी करती थी कल कल,
थी तेरे संग प्रकृति सुहानी,
पानी तेरी यही कहानी॥

तू शान्त स्निग्ध रजत सा उज्जवल,
तू कितना पावन कितना निर्मल,
बिन तेरे जीवन बेईमानी,
पानी तेरी यही कहानी,
तेरे बिना अवनि अनजानी॥


कितना पावन था तू पहले,
अब कितना दूषित है तू?
निज मनुज की है शैतानी, पानी तेरी यही कहानी,
तेरे बिना अवनि अनजानी॥


और अंत मेँ,


बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी,
जो हमने इसकी महिमा जानीं,
नई स्रष्टि अब हमेँ बनानी,
तेरे बिना अवनि अनजानी,
पानी तेरी यही कहानी॥

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