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बचपन की यादेँ

Actually this is not my own poetry, I heard it 4 year before, I don't know who's the author but the lines are-
तुम्हारी याद आती है तो सावन याद आता हैँ ॥
बहारेँ याद आती हैँ वह आँगन याद आता हैँ ॥


किया करते थे हम झगड़े,
सब पेड़ोँ पर चढ़के,
वह मौसम याद आता है,
वह बचपन याद आता है ॥


तेरी कागज की छोटी नाँव जब पानी मेँ डूबी थी॥
वह आँखोँ मेँ तेरे आँसू बुझा मन याद आता हैँ ॥

खिलौनोँ के लिए माँ से रोना,
लड़कपन के वो आँसू,
वो जमाना याद आता है॥
बागोँ मेँ घूमना मेरे हाथोँ को पकड़ कर,
तोड़ना आमोँ को पत्थर से याद आता है॥
I've forgot the last stanza but I think that's excellent poetry.

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बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।

न होगी गमोँ की रात, न होगी कष्टोँ की बरसात, बदलेगा अपना भी जीवन, खुशियोँ से भर जायेँगे दामन, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। दिन बदलेँगे अपने भी, होगा इक नया सवेरा, चिड़ियोँ की चहकन से गूँजेगा अपना बसेरा, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तब न आएगी कोई मुश्किल, न बिगड़ेगी कोई बात, लम्बे होँगे खुशियोँ के दिन, कम होगी कष्टोँ भरी रात, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तुम चलना मेरे संग-संग, बदलेँगे अपने रंग-ढंग, हो जाएँगे गैर भी अपने, पूरे होँगे अपने सपने, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।