Actually this is not my own poetry, I heard it 4 year before, I don't know who's the author but the lines are-
तुम्हारी याद आती है तो सावन याद आता हैँ ॥
बहारेँ याद आती हैँ वह आँगन याद आता हैँ ॥
किया करते थे हम झगड़े,
सब पेड़ोँ पर चढ़के,
वह मौसम याद आता है,
वह बचपन याद आता है ॥
तेरी कागज की छोटी नाँव जब पानी मेँ डूबी थी॥
वह आँखोँ मेँ तेरे आँसू बुझा मन याद आता हैँ ॥
खिलौनोँ के लिए माँ से रोना,
लड़कपन के वो आँसू,
वो जमाना याद आता है॥
बागोँ मेँ घूमना मेरे हाथोँ को पकड़ कर,
तोड़ना आमोँ को पत्थर से याद आता है॥
I've forgot the last stanza but I think that's excellent poetry.
तुम्हारी याद आती है तो सावन याद आता हैँ ॥
बहारेँ याद आती हैँ वह आँगन याद आता हैँ ॥
किया करते थे हम झगड़े,
सब पेड़ोँ पर चढ़के,
वह मौसम याद आता है,
वह बचपन याद आता है ॥
तेरी कागज की छोटी नाँव जब पानी मेँ डूबी थी॥
वह आँखोँ मेँ तेरे आँसू बुझा मन याद आता हैँ ॥
खिलौनोँ के लिए माँ से रोना,
लड़कपन के वो आँसू,
वो जमाना याद आता है॥
बागोँ मेँ घूमना मेरे हाथोँ को पकड़ कर,
तोड़ना आमोँ को पत्थर से याद आता है॥
I've forgot the last stanza but I think that's excellent poetry.
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