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Showing posts from 2010

kaun hai wo ladki.

पतझड़ थे सूखे थे खड़े थे उजड़ी क्यारी मेँ । अमृत बनकर आई थी तुम मेरी इस फुलवारी मेँ॥ Na Woh Inkaar Karti Hai, Na Woh Ikraar Karti Hai Hamein Phir Bhi Yakin Hai Woh Hami Se Pyaar Karti Hai

ऐ खुदा, तू बता॥

अपने जब अपने न रह जाएँ जीवन के हर सपने बिखर से जाएँ। मंजिलोँ के रास्ते भटक से जाएँ। या फिर बढ़ते कदम खुद ही ठिठक जाएँ॥ तब तू ही बता ऐ खुदा, क्या हम जिन्दगी की राह पर चलते जाएँ। या फिर मौत की राह से गुजर जाएँ॥

मैँने आँसू बनकर देखा है॥

पढ़ लिए सारे शास्त्र, रट लिए वेद पुराण, पर समझ न पाया इसकी भाषा, इसकी पीड़ा, करुणा और अभिलाषा, एक अश्रु जो कभी, गम को दर्शाता है, तो कभी खुशियोँ को भी, अंखियोँ मेँ दिखाता हैँ, कौन जाने क्या होगी इसकी कहानी, दिल मेँ आग दृगोँ मेँ पानी, मिलेँगे हर मोँड़ पर आँसू, जीवन भी टेढ़ी रेखा हैँ, जानता हूँ मैँ इसको क्योँकि, मैँने आँसू बनकर देखा हैँ॥

प्रेम दीवाना

आज फिर मेरी फुलवारी, मेँ खिला है एक गुलाब, उसकी सुर्ख लाल पंखुड़ियाँ, चारोँ तरफ फैलती , भीनी भीनी खुशबू, प्रभात को भी अर्ज करती थी आदाब॥ ******************* पंखुड़ियोँ पर जमी ओस पर, जब पड़ती थी सूर्य की मंद किरण, सतरंगी प्रकाश की किरणेँ, रंग देती थी वातावरण॥ ******************* मैँ भी उस फूल को निहार रहा था, पर मेरा ध्यान उन काँटोँ पर गया, जो उस फूल की सुरक्षा मेँ लगे थे, जिन्होने खुद की सुन्दरता त्यागी, उस दो दिन के मेहमान के लिए॥ ******************* मैँ उसकी पंखुड़ियोँ की स्निग्धता, पर मैँ इतना मुग्ध था कि मैँने उसे तोड़ लिया, उसे उन काँटोँ से अलग कर दिया॥ ******************* मैँने उसे जल मेँ रखा, परिस्थितियाँ अब भी उसके अनुकूल थी, पर उस फूल को शूल से पृथक करना, क्या मेरी भूल ना थी? ******************* *******************

नीम का पेड़

बचपन मेँ, साँझ ढले, उस गली मेँ उगे, नीम के नीचे, बैठा करते थे कुछ वृद्ध जन। खो जाते थे अतीत मे, वर्तमान को झकझोरते हुए, भविष्य को देते थे सम्मन, आज जब बीस बरस बाद, जब मैँ लौटा हूँ, फिर उस गली मेँ, सब कुछ बदल गया है, शाम तो वही है , पर न तो वृद्ध जन, न ही वह रौनक, सब अपनोँ मेँ व्यस्त । और अपनत्व से भरा, वह नीम का पेड़, मुरझाया हुआ , तड़पता हुआ, अपने अन्त पर रो रहा था, सुनहरे अतीत को याद कर, किसी सरकटी लाश की तरह, असाध्य वेदना से ग्रसित होकर . . . . . . . . .

Welcoming the 9th month of the year

बचपन की यादेँ

Actually this is not my own poetry, I heard it 4 year before, I don't know who's the author but the lines are- तुम्हारी याद आती है तो सावन याद आता हैँ ॥ बहारेँ याद आती हैँ वह आँगन याद आता हैँ ॥ किया करते थे हम झगड़े, सब पेड़ोँ पर चढ़के, वह मौसम याद आता है, वह बचपन याद आता है ॥ तेरी कागज की छोटी नाँव जब पानी मेँ डूबी थी॥ वह आँखोँ मेँ तेरे आँसू बुझा मन याद आता हैँ ॥ खिलौनोँ के लिए माँ से रोना, लड़कपन के वो आँसू, वो जमाना याद आता है॥ बागोँ मेँ घूमना मेरे हाथोँ को पकड़ कर, तोड़ना आमोँ को पत्थर से याद आता है॥ I've forgot the last stanza but I think that's excellent poetry.

अगर जहाँ मेँ मोहब्बत ना होती॥

Agar jhan me kambakht ye mohabbat na hoti........ Shararat na hoti, shikayat na hoti, Naino me kisi ki nazakat na hoti, Na hoti bekrari, Na hote hum tanha, Agar jhan me kambakht ye mohabbat na hoti….. Na hote ye sapne, Ye khwabon ki duniya, Kisi ko chahat ki tamanna na hoti Agar jhan me kambakht ye mohabbat na hoti. . . . . .

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जल ही जीवन

पानी तेरी यही कहानी, तेरे बिना अवनि अनजानी, झरनोँ का था संगीत अमर, नदियाँ भी करती थी कल कल, थी तेरे संग प्रकृति सुहानी, पानी तेरी यही कहानी॥ तू शान्त स्निग्ध रजत सा उज्जवल, तू कितना पावन कितना निर्मल, बिन तेरे जीवन बेईमानी, पानी तेरी यही कहानी, तेरे बिना अवनि अनजानी॥ कितना पावन था तू पहले, अब कितना दूषित है तू? निज मनुज की है शैतानी, पानी तेरी यही कहानी, तेरे बिना अवनि अनजानी॥ और अंत मेँ, बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी, जो हमने इसकी महिमा जानीं, नई स्रष्टि अब हमेँ बनानी, तेरे बिना अवनि अनजानी, पानी तेरी यही कहानी॥

My first love letter to My Girlfriend.

well before this, i just wanna say ,that this poetry is for my luv 1, i wanna gave it to her by a letter. But finally two year before I send it to her by mail and sms,but isme wo feeling na aayi hongi jo kajaz pr aati h. (for u U. P. ) What a beauty I find. Like a precious n sweet wind. My heart wins the whole race. When I see her smiling face. I praise for her patience. And inspire from intelligence. May she succeed nd keep her virtue. So that none can hurt you. Joys fills me her lake like eyes. Seems me a sight of sun rise. May her joyous always remain. And she never get any pain. Happiness comes to her in a chain. Her life fulls with fun's rain. The are n't some poetic line. For me these are sacred and hymn. Plz try to understand me better. And write the answer of this letter.

बहाने न बनाएँ, हेलमेट पहने॥

एक हाथ मा एक्सीलीटर, दूजे मा मोबाइल है। फाट परे जब नाली मा, भूलै सब स्टाइल है॥ लिऐ गवनवाँ जाए रहै, होठोँ पर स्माईल थी। पहुड़ै है अब अस्पताल मा भूले सब स्टाइल हैँ॥ नक्सेबाजी मा कम नहीँ, फाट परे तो गम नहीँ, फिकर है कि कोई देखिस नहीँ, यू कहौ टूटी उनकी चेसिस नहीँ, फाट परे जब नाली मा भूलै सब स्टाइल है॥

बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।

न होगी गमोँ की रात, न होगी कष्टोँ की बरसात, बदलेगा अपना भी जीवन, खुशियोँ से भर जायेँगे दामन, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। दिन बदलेँगे अपने भी, होगा इक नया सवेरा, चिड़ियोँ की चहकन से गूँजेगा अपना बसेरा, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तब न आएगी कोई मुश्किल, न बिगड़ेगी कोई बात, लम्बे होँगे खुशियोँ के दिन, कम होगी कष्टोँ भरी रात, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो। तुम चलना मेरे संग-संग, बदलेँगे अपने रंग-ढंग, हो जाएँगे गैर भी अपने, पूरे होँगे अपने सपने, बस थोड़ा इन्तजार और कर लो।
ब्लागिँग के मेरे नए दोस्तोँ, मैं हूँ देवेन्द्र, आपका नया दोस्त। उम्मीद है मैँ आप सबके विश्वास पर खरा उतरुँगा